गम ए ज़िंदगी तेरी राह में..
सब ए आरज़ू तेरी चाह में..
जो उजड़ गया, वो बसा नही..
जो बिछड़ गया.. वो मिला नहीं..
जो दिल ओ नजर का शुरुर था..
मेरे पास रह कर भी.. दूर था..
वो इक गुलाब उम्मीद का..
मेरी शाख ए जान पर खिला नहीं..
मेरा हमसफ़र जो अजीब हैं..
तो अजिबतर हूँ.. मैं भी..
मुझे मंजिलों की खबर नहीं..
उसे रास्तों का पता नहीं..
बस एक कारवाह से राह गुजर..
मैं हारा हूँ.. तो बस इसीलिए..
मैंने कदम तो सबसे.. मिला लिए..
मेरा दिल.. किसी से मिला नहीं..।